Wednesday, October 15, 2014

एक वृक्ष की शाख हैं हम Ek Vriksh Ki Shakh Hai Ham

एक वृक्ष की शाख हैं हम

साथ हैं हम, हाथ हैं हम,
एक वृक्ष की शाख हैं हम,

विंध्य हिमाचल से निकली जो,
उस धारा की गति प्रवाह हम,
मार्ग दिखाने इक दूजे को,
बुजुर्ग अनुभव की सलाह हम,
फटकार हैं हम, डांट हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम।

बचपन का उत्साह हम ही हैं,
खेल कूद की हम उमंग हैं,
जीवन के हर एक कदम पर,
जोश विजय की हम तरंग हैं,
राह बताते हाथ हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम।

हम पंजे की अंगुलियाँ हैं,
इन्द्रधनुष के रंग हैं हम,
जीवन की हर उथल पुथल में,
कदम कदम पर संग हैं हम,
पूर्ण चन्द्र की रात हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम।

हम धरती का धर्य लिए हैं,
आसमान सा बड़ा लिए दिल,
साथ साथ बढ़ने निकले हैं,
हाथ हाथ में होकर इकदिल,
इक दूजे की आँख हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम। 
साथ हैं हम, हाथ हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम

-- नीरज द्विवेदी
-- Neeraj Dwivedi

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...