Wednesday, May 28, 2014

एक लत Ek Lat


मेट्रो भी अजीब है
जितनी ज्यादा
बेतरतीब आवाजें सुनाई देतीं हैं
ज्ञान गंगाएँ
उतना ही शांत हो जाता हूँ मैं,

जितनी ज्यादा भीड़ मिलती है
अनजान लोगों की
अनभिज्ञ चेहरों की
उतना ही अकेला हो जाता हूँ मैं,

जैसे ही अकेला होता हूँ
शांत होता हूँ
तुम आ जाते हो
ख्यालों में,

बहुत जिद्दी हो
कहीं कभी अकेला छोड़ते ही नहीं
एक लत बन गए हो तुम।

n  नीरज द्विवेदी
n  Neeraj Dwivedi

8 comments:

  1. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

    ReplyDelete
  2. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - १३ . ७ . २०१४ को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

    ReplyDelete
  3. nice presentation of feelings

    ReplyDelete
  4. thanks for sharing this wonderful article. We are the best at&t support, at&t support,at&t customer service phone,atandt customer service. how to contact At&T Support

    ReplyDelete
  5. thanks for sharing this wonderful article. We are the best at&t support, at&t support,at&t customer service phone,atandt customer service. how to contact At&T Support

    ReplyDelete
  6. Thanks for sharing this useful information with us .I am looking for this from a long time and I really very happy to say That I also deals with this service contact outlook support,outlook coustomer support,outlook contact number,outlook help contact,outlook mail contact

    ReplyDelete
  7. Thanks for sharing this useful information with us .I am looking for this from a long time and I really very happy to say That I also deals with this service contact outlook support,outlook coustomer support,outlook contact number,outlook help contact,outlook mail contact

    ReplyDelete

प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...