Sunday, January 26, 2014

क्षणिका – महँगी धरती

क्षणिका – महँगी धरती

कल
धरती पर
जो लुट जाती थी
वो जान
लूट ली जाती आज ...
कल भी धरती महँगी थी
आज भी धरती महँगी है ...

--    Neeraj Dwivedi 
-- नीरज द्विवेदी

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