Saturday, August 24, 2013

वीर सावरकर Veer Savarkar

अभी मैं movie देख रहा था - वीर सावरकर
Snapshot from the movie Veer Savarkar.
एक घटना उधृत कर रहा हूँ ---
वीर विनायक दामोदर सावरकर के बचपन का नाम था तात्या। तात्या जब वकालत के लिए लन्दन गए तो वहाँ सबसे पहले उन्होंने इटली के बड़े क्रन्तिकारी मैजिनी की आत्मकथा का मराठी में अनुवाद किया। उस पुस्तक को उन्होंने पूने अपने बड़े भाई को भेजी उसे प्रकाशित करने और स्वतंत्रताप्रेमी नवयुकों को वितरित करने के लिए। सावरकर भाईयों के प्रेरणास्त्रोत थे तिलक (बाल गंगाधर तिलक (नेता गरम दल)).

एक दिन तिलक ने तात्या के बड़े भाई से पूँछा कि पुस्तक को प्रकाशित करने का व्यय कहाँ से जुटाया? उन्होंने कहा लोगों से एडवांस में ले लिया फिर पुस्तक छपवाकर तत्काल उन सब तक पहुंचा दी गयी। तिलक ने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा इसी धन से सारा काम हो गया, मैं तो इसलिए पूँछ रहा था कि अगर किसी का उधार बाक़ी रह गया हो तो मैं कुछ मदद करूँ। उस माँ भारती के सपूत ने हिचकते हुए कहा, नहीं नहीं इसकी जरुरत नहीं है, कुछ पैसा कम पड़ा था तो मेरी और सावरकर की पत्नी ने अपनी चूड़ियाँ बेंच दी।

कुछ दिनों बाद उनके भाई को कालेपानी भेज दिया गया और उन दोनों देवियों को बेघर कर दिया गया।


है न अद्भुत ... कैसे कैसे लोग थे वो।

2 comments:

  1. हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} पर कल पहली चर्चा में आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर .... Lalit Chahar

    ReplyDelete
  2. उत्तम प्रस्तुति-
    आभार-

    ReplyDelete

प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...