Infolinks

Friday, July 19, 2013

इंटों के जंगल Enton Ke Jangal

Kedarnath Tragedy, India, 2013: Image from Jagran.com
बारिश की बूँदों यहाँ बरस लो, बेशर्मी से बार बार,
खाली हो जाना अबकी, हो चुकी अगर हो शर्मसार…

पत्थर रोये  धरती रोई, बर्फ शर्म से  ऐसी पिघली,
जल जीवन कहने वालों को, मौत दिखाई इतनी उजली…

मानवता के दिखे  चीथड़े, अबकी रूठ गया भगवान,
रोया बचपन रोई जवानी, अबकी रोया सकल जहान…

इस बार बहाया भारत की, आँखों ने है जी भर पानी,
जीवन में पहली बार दिखी, पानी की ऐसी मनमानी…

चाहें जितना गरियाऊँ मैं, पानी को आग लगाऊँ मैं,
कैसे कैसे  व्यंग्य गढ़ूं, मानव तुझको समझाऊँ मैं…

ये अंधी दौड़ भयानक है, हर बार मनुज ही रोते हैं,

इंटों के जंगल से बेहतर, लकड़ी के  जंगल होते हैं।

-- Neeraj Dwivedi

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...