Wednesday, June 5, 2013

एहसास Ehsas

चाहे जितनी कोशिश कर लूँ
पूरा होने की

पर मुझे पता है
तुम्हारे बिना अधूरा ही रहूँगा
अतृप्त ही रहूँगा
सूनी आँखों से क्षितिज को निहारता ही रहूँगा ...

देखूँगा स्वयं को
डूबता हुआ
पिघलता हुआ
रोज चारो ओर ...

ढलकता ही रहूँगा आँखों से
एक आस छोड़कर
आँखों में
अगली सुबह के लिए
वो अगली शाम को ढलेगी
लुढ़ककर
धूल को नम कर जाएगी ... शायद तुम्हे भी

फिर भी तुम्हे एहसास नहीं होता?

या होता है?

-- Neeraj Dwivedi

-- https://www.facebook.com/LifeIsJustALife

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