Sunday, June 30, 2013

अश्रु और अकेलापन, Asru aur Akelapan

अकेले में,
सुकून से,
आँखों के खाली होने का,
दिल के हलके होने का,
रोने का भी
अपना अलग मजा है …

ये दो चार
अनजान सी बूँदें
न जाने कहाँ से आकर,
सारा बोझ,
सारा नैराश्य,
सारा खेद,
सारा शोक,
सारी निराशा, 
सारा आलस्य,
सारा क्षोभ,
न जाने कैसे
इतनी आसानी से,
इतनी सुगमता से,
न जाने कहाँ
बहा ले जाती हैं …

और एक अद्भुत
चैतन्य पूर्ण प्रेरणा,
एक अनुभव,
एक आग्रह,
एक दिशा,
एक सोच,
एक विचार,
एक लक्ष्य,
और कभी कभी एक नज्म दे जातीं हैं …

एक सुबह दे जातीं हैं … हैं न?

10 comments:

  1. सरल .... सहज अभिव्यक्ति ....
    शुभकामनायें ...

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  2. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 03/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार।

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  4. अकेले में,
    सुकून से,
    आँखों के खाली होने का,
    दिल के हलके होने का,
    रोने का भी
    अपना अलग मजा है............
    बेहतरीन रचना

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  5. Interesting ! I almost imagined it in rajesh khannas voice !
    aasoon sach me mann ko thoda halka kardete hai !

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  6. This would have been wonderful if written as a right aligned normal text. It would have appeared more convincing and thought provoking.

    Do not get me wrong, I loved the intent, it is indeed meaningful but I have some strong prejudices about poems in general. You can completely ignore my comment, I do not wish to offend.

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    Replies
    1. I appreciate your each and every word Harshal. As I already mentioned -- प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है. I always take comments positively and seriously.
      Thank you.

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  7. गहन भाव लिए सुन्दर सार्थक रचना...
    :-)

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प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --