Sunday, June 30, 2013

अश्रु और अकेलापन, Asru aur Akelapan

अकेले में,
सुकून से,
आँखों के खाली होने का,
दिल के हलके होने का,
रोने का भी
अपना अलग मजा है …

ये दो चार
अनजान सी बूँदें
न जाने कहाँ से आकर,
सारा बोझ,
सारा नैराश्य,
सारा खेद,
सारा शोक,
सारी निराशा, 
सारा आलस्य,
सारा क्षोभ,
न जाने कैसे
इतनी आसानी से,
इतनी सुगमता से,
न जाने कहाँ
बहा ले जाती हैं …

और एक अद्भुत
चैतन्य पूर्ण प्रेरणा,
एक अनुभव,
एक आग्रह,
एक दिशा,
एक सोच,
एक विचार,
एक लक्ष्य,
और कभी कभी एक नज्म दे जातीं हैं …

एक सुबह दे जातीं हैं … हैं न?

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...

Facebook Followers

Facebook Likes