Sunday, April 7, 2013

तोड़ न पाओगे हौसला हवाओं का Tod Na Paoge Hausala Hawayon ka


खद्दर के कानून से रिश्ते करीबी बहुत हैं
यहाँ नोटों की किस्त से बिकते बहुत हैं।

बिखरती रौशनी  है टूट कर  हर ओर,
हमारे दिल के जज्बात पुख्ता बहुत हैं।

मर रहा  कसमसाकर भारत शनैः शनैः
गद्दारों की रक्षा में तैनात बंदूकें बहुत हैं।

मोमबत्तियाँ चलीं थीं लगा जगे हैं लोग
यहाँ नींद में  चलने वाली भेंड बहुत हैं।

लड़ रहें हैं, करते रहेंगे बूँद बूँद बलिदान,
लहू पानी सा  बहाने वाले लोग बहुत हैं।

तुम तोड़ न  पाओगे हौसला हवाओं का,
बसंती आँधियों की उड़ानों के किस्से बहुत हैं।
- Neeraj Dwivedi

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