Sunday, March 3, 2013

आओ कभी सड़कों पर Aao Kabhi Sadkon Par


हाँ ...
तुम्हें तो ...
रौशनी रौशनी दिखेगी,
आसमानों की ...
नजर से ...
देखते हो ना ...

आओ कभी ...
सड़कों पर ...
मज़बूरी की चप्पल पहने ...
बेशर्मी का चिथड़ा ओढ़े ...

तब गड्ढे भी दिखेंगे ...
और ...
इनके भीतर का ...
अँधेरा भी ...
साथ ही दिखेंगे ...
वो लोग ...
जो तुम्हारे भारत को ...
आज तक ...
अपने कन्धों पर ...
ढोते आ रहे हैं।

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