Thursday, February 7, 2013

दिमाग की बैंड बजाओ मत Dimag Ki Band Bajao Mat


तुम बरस  जाओ चिल्ल्लाओ मत,
मेरे सर पर राग भैरवी गाओ मत,
मत चीखो सब बहरे हैं,
बेशर्म हवा के पहरे हैं,
मर जाने दो भूखों को,
ये भूख संग मर जाएगी,
दो एक निवालों से दुनिया की,
भूख नहीं मिट जाएगी,
जाओ जाकर आराम करो,
बस पेट भरो और शाम करो,
कैसी बातें करते हो तुम,
दिन सी रातें करते हो तुम,
न जाने क्या सोच सोच,
चल पड़ते हो सड़कों पर,
सड़कों पर मुर्दे चलते हैं,
सो सो कर आंखे मलते हैं,
किस किस की आंखे खोलोगे,
मुर्दों को स्वप्न दिखाओगे,
सतरंगी एक स्वप्न लेकर,
तुम कब तक चलते जाओगे,
जाओ जाकर विश्राम करो,
थोडा अपना भी ध्यान करो,
किस कुम्भकरण के कानों में,
तुम बिगुल बजाने आए हो,
हम खुली आँख से सोने वाले,
हमको राह दिखने आए हो,
अपना रस्ता नापो शरमाओ मत,
मेरे दिमाग की बैंड बजाओ मत,
तुम बरस जाओ चिल्ल्लाओ मत,
मेरे सर पर राग भैरवी गाओ मत।

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