Monday, February 20, 2012

मदहोश अब तक पिये जा रहा हूँ


Image from google with thanks.
भभकता  दिया  हूँ,  अकेले  जिया हूँ,
तेरे  बिना  हूँ जान, बहुत   बेजुबां हूँ।

खामोश हूँ चुप हूँ खुद को दबाये हुये हूँ,
देश पर लिख अपना दर्द छिपाये हुये हूँ।

एक ढेर को तपिश का  इंतजार रब से,
बहकता हूँ मैं   मौत सा ही  जिया हूँ।

कहने को  अब  बात  बाकी न  कोई,
कुछ न  कहा था बहुत कुछ किया हूँ।

बिखरती है  निंदिया  उलझतीं है बातें,
बड़े शान से  तन्हा  गुजरती है  रातें।

वक्त का  इम्तहान  दिये जा रहा हूँ,
भूल जाने की शै में  जिये जा रहा हूँ।

मेरे दिल में  उन्होने जगह जो बनाई,
कि मदहोश अब तक पिये जा रहा हूँ।

बेहद चैन से कब्र सा जिये जा रहा हूँ,
मोहब्बत की लत है  पिये जा रहा हूँ।

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