Sunday, February 19, 2012

कुछ हाइकू

अभी हाइकू लिखना सीख रहा हूँ ... कुछ हाइकू प्रस्तुत हैं आप सबके समक्ष। किसी भी प्रकार की कोई त्रुटि आपको दिखे, तो अवश्य बतायें। मैं आपकी टिपड्डी के लिए बहुत ही आभारी रहूँगा।
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बदला युग,
गति में जीवन है,
बदले हम।
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मैंने देखा है,
वो डूबता सूरज,
मेरा भारत।
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बरसे आंसू,
बेईमान यह भी,
सुख दुःख में।
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रिक्त अमीरी,
अधिक सुखद है,
तृप्त गरीबी।
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संतुष्ट मन,
निर्धन उपवन,
हँसता माली।
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