Thursday, February 16, 2012

अभी तो सब कुछ बाकी है


सो चुके  बेहोश  अब तक,
सुबह का अपमान कर हम,
वक्त बदला  हम भी बदले,
चोर का  सम्मान कर हम।

मृतप्राय भारत है मचलता, इसमें शायद जान बाकी है,
इस देश को फिर जीवित, करने का  अरमान बाकी है।

इक भोर की आशा बिलख,
दफनती है  शाम को रोज,
अभी  शहीदों  के  उबलते,
रक्त का परिणाम बाकी है।

अब न छोड़ो आस जीत की, और सत्य के संगीत की,
अपने सुभाष के कत्ल का, अभी तक अंजाम बाकी है।

सत्ता भ्रष्ट के विनाश की, जन  समानता की जीत की,
इस खानदान से लुटने में अब क्या कोई कसर बाकी है?

अब उठो  अब उगो  राष्ट्र के, बंजर  हुये इस  खेत में,
बस कुछ शहीदों की  बदौलत देश का सम्मान बाकी है।

सुभाष  बिस्मिल  आज़ाद  के,
भारत का  पुनर्निमाण बाकी है,
गावों की गर्द भरी  गलियों में,
सड़ते देश का कल्याण बाकी है।

इसी हमारे भारत के बोझिल बचपन का अब निर्माण बाकी है,
गिरते देश का  उत्थान बाकी है, शौर्य का  सम्मान  बाकी है।

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