Monday, February 13, 2012

कभी सुने शब्द थे: त्याग तपस्या



भूला  भारत त्याग  तपस्या,
करे   गुलामी   पश्चिम की,
भूल  आत्मबल  और चरित्र,
पूजन   करता बस धन की।

आज  भाई   भाई  को मारे,
भरत सा  भाई  कहीं   नहीं,
भूल गए हम ऋषि दधीचि को,
अब ऐसे मानव न यहाँ कहीं।

वो कौन समय था कौन घड़ी थी,
त्याग  की महिमा बहुत बड़ी थी,
आज  त्याग दो   ही  दिखलाते,
दुनिया  में जो माँ बाप कहलाते,
देख   देख  पश्चिम  को  बच्चे,
यहाँ भी  उनको  घर से भागते।

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