Sunday, February 12, 2012

मैं भी कायर हूँ


My Diary and Pen - Neeraj Dwivedi

व्यर्थ चलाना कलम रात भर,
अब व्यर्थ जताना अपने भाव,
लोग व्यस्त हैं क्षुधा पूर्ति में,
लेकर  अपनी  अपनी  नाव।

पढ़ कर  थोड़ा खुश होते हैं,
कुछ पल को चिंतित होते हैं,
फिर  लाइक का बटन दबा,
कर्तव्य पूर्ण समझ सो लेते हैं।

मैं कोई तुमसे  अलग नहीं,
मैं भी  कायर हूँ  डरता हूँ,
देश की सर्द अंधेरी रातों में,
बस छिप छिप पन्ने भरता हूँ।

क्रांति क्रांति  बस कह देना,
कोई क्रांति नहीं ले आता है,
युवा विचारों पर पश्चिम की,
बस  जंग जरा पिघलाता है।

मैं ढूंढ रहा हूँ बिना रक्त के,
देश   जगाने  बाली  भाषा,
मन किंचित चिंतित है लेकर,
अपने  शब्दों  की  परिभाषा।

शब्द  ब्रह्म  है  मालुम  है,
इसलिए   सहारा  लेता  हूँ,
कहीं  डूब न जाए रक्तपात
में  देश  किनारा  लेता हूँ।

मैं नहीं  चाहता गिर जाए,
ये देश  और अँधियारों में,
सो जाति धर्म के नाम बिना,
बस माँ का सहारा लेता हूँ।
इसलिए  किनारा  लेता हूँ।

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...