Thursday, February 2, 2012

रेत सी जिंदगी


Sand Bagha Beach Goa: Clicked by Neeraj




रेत सी है जिंदगी,
फिसलती जा रही है,
मीठी है पर कुल्फी,
पिघलती जा रही है।

कहने को तो कई साल,
चल बसे जिंदगी के,
पाने को हाथ खाली,
देने को हाथ खाली,
अब तो शर्मों हया भी,
गुजरती जा रही है।

डूबता है रोज सूरज फिर,
एक नए दिन के इंतजार में,
खोखला कर रहे हैं देश पूरा,
वो खादी के लिबास में।

क्या किया हमने भी आज तक,
कलम, पन्ने घिसने के सिवा,
किसे जगाया हमने आज तक,
थोड़ी वाह वाही पाने की सिवा।

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