Tuesday, January 31, 2012

हमने तो अपनी अकल लुटाई

Clicked by Neeraj Dwivedi
बीती रात बंदरिया बोली,
ये देश बना बंदर की खोली,
बनी मदारिन अपनी मैडम,
नाचे नचाबे जनता भोली।

सिरमौर बने मनमोहक ठाकुर,
चूँ न निकले बस पूंछ घूमावे,
जनता मूरख ठगी सी देखे,
ये पूरा देश गुलाम बनावे।

हम बकबक करते न अघावे,
हम तो अनपढ़ पूरे उल्लू,
कुछ न सुना देखा न बिल्कुल,
तुम कटत शाख पर सोवत उल्लू।

बड़ा तमाशा देखा जग ने,
मेरा घर फूँक ठहाके मारे,
रोटी छत को तरशे बचपन,
दिखते हैं दिन में अब तारे।

कसम खाई है अब भी अपनी,
आँख न हम खोलेंगे भाई,
जब तक हाथ में लिए कटोरा,
घूमन की नौबत न आए,
तब तक हम न जगेंगे भाई।
तब तक हम न जगेंगे भाई।।

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