Tuesday, January 17, 2012

बलराम हमें बनना होगा



उन देशभक्त मतवालों का, कुछ एक सुनहरी शामों का,
कब तक करेगा अपना भारत, इन्तजार घनश्यामों का

कहाँ सो गयी जलने वाली, स्वाभिमान की आग प्रखर,
कहाँ खो गयी कवियों की, प्रेरणादायक आवाज मुखर...

कहाँ व्यस्त चाणक्य गुरु, न जन्मा फिर एक चन्द्रगुप्त,
या बंजर हो गयी देव भूमि ये, हुआ तेज ये कहाँ बिलुप्त...

वो श्याम नहीं आयेगा अब, बलराम हमें बनना होगा,
इस अपनी माँ की रक्षा का तो, भार वहन करना होगा

करना होगा अब स्वदेश का, जीवित फिर से तेज प्रबल,
इस भ्रष्ट निरंकुश सत्ता का, अब करना होगा अंत सबल...

भारत को अपने भुजदंडों का, जोर पुनः अजमाना होगा,
अपने भारत की प्रभुसत्ता को, पुनः आदर्श बनाना होगा

इस भारत माँ की महिमा को, फिर से मंडित करना होगा
उठ नवसपूत भारत के इसको, पुनः अखंडित करना होगा...
इसको पुनः अखंडित करना होगा.

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...