Monday, January 2, 2012

तलाश: वक्त की तलाश


तलाश
वक्त की तलाश,
उमड़ते घुमड़ते सजल बादलों के संग,
चहुँ ओर बिखरा उज्जवल भगवा रंग,
भानु की अनुपम छटा बिखरी गगन में,
या नवक्रांति की पताका फहरती पवन में,
दूर से अविराम आती पाँञ्चजन्य ध्वनि,
अधूरी नींद से जगकर तत्पर कर्ममुनि,
मैं आज निकला हूँ किसी की तलाश में,
काश मिल जाये फिर से कोई क्रांतिवीर,
भविष्य के स्वर्णिम वक्त के लिबास में
मैं आज फिर निकला हूँ

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