Wednesday, December 28, 2011

अस्तित्व एक बूंद का: अश्रु


अस्तित्व एक बूंद का: अश्रु

अश्रु क्या है?
एक खारी बूँद, जल की
एक आर्द आह, पवन की
एक शांत वेवेचना, मन की

अश्रु क्या है?
एक करुण पुकार, शिशु की
एक प्रीति, वात्सल्यमयी माँ की
एक दृष्टा, सुखद प्रेमी मिलन की
एक झलक, आतुर विरह तन की

अश्रु एक, रंग एक, स्वाद एक
और एक मूर्ति, संजोये भाव अनेक
मौन भाषा, और व्याकरण के
संग प्रस्तुत कथा मन की

अश्रु क्या है? ये है अश्रु का अस्तित्व

यदि अश्रु न हो?
यदि हो जायें अश्रु अस्तित्वहीन?

वात्सल्य घुट जाये, तन में
मौन हो जायें भाव, मन में
वाणी कब तक साथ दे, यदि
रुंध जाये कंठ, प्रिय मिलन में

यदि फिर भी जीवित रहें वर्जनाएं शब्दों की
तो क्या हो जाये मानव भावशून्य
घोंट दे आशा, निराशा, दर्द, प्यार,
स्नेह, हर्ष इसी निर्जीव माटी के तन में

तब कैसे होगी विविध भावाव्यक्ति
निर्बल मानव के भावुक मन में?
यदि हो जायें अश्रु अस्तित्वहीन?

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