Thursday, December 22, 2011

मैं बंटा हुआ हूँ



मैं बंटा हुआ हूँ,
खुद में, तन में, मन में, धन में,
और भांति भांति के व्यर्थ चलन में,
मानव मन की हर संभव गति संग,
जल थल अग्नि नभ और पवन में ...

मैं डटा हुआ हूँ,
जीवन के कर्मक्षेत्र के प्रबल युद्ध में,
महावीर रथी लिए कलम हैं कर में,
निर्बल असहायों का करुण क्रंदन सुन,
निर्मूलन अत्याचारों का निश्चय मन में।

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