Tuesday, November 22, 2011

कुदरत



कुदरत ईमान है, अंजाम है मोहब्बत का,
वक्त की पहचान है नतीजा है इबादत का

अरे इंसान शुक्र है खुदा ने ये कुदरत बनाई है,
जाकर ऐश कर जब तक इसकी रहनुमाई है

इन्साफ के दरख्तों को भूल मदहोश मत हो,
यदि अंत हो इसका तो तू है बस तेरी तन्हाई है

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