Wednesday, November 9, 2011

जीवन धारा



अविरल चलती करती छल छल,
रखती सुख दुःख जीवन धारा।
स्वयं अकिंचन, भरती कण कण,
गति निर्मोही ये जीवन धारा॥

जलधारा की गति सागर अर्पित,
जीवन धारा मृत्यु समर्पित।
सतत समय के रथ पर चढ़,
पल में हँसती रोती जीवन धारा॥

सत्य समय के असीम पट पर,
जीवन चित्रित करती पल पल।
मानव के अनगिन रूपों का,
अद्भुत वर्णन करती जीवन धारा॥

शब्दार्थ:
अविरल = बिना रुके
अकिंचन = कुछ भी नहीं (nothing)
निर्मोही = माया मोह रहित
सतत = लगातार
असीम = सीमा रहित (Unlimited)

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