Tuesday, October 11, 2011

पलकों की पीर


अपने ब्लॉग में सौवाँ पोस्ट करते हुए मुझे बड़े गर्व का अनुभव हो रहा है। अपनी इस यात्रा में मैंने केवल और केवल पाया ही है, बहुत सारे कवियों का स्नेह, ममता, साथ ही कुछ बहुत ही उपयोगी आलोचक भी। मैं ह्रदय से बहुत आभारी हूँ आप सबका, मेरे ब्लॉग तक आने के लिए, Followers के रूप में मेरा उत्साह बढाने के लिए, Comments के साथ मुझे आशीर्वाद देने के लिए। ये ६ महीनो का समय कैसे गुजर गया मुझे पता नहीं चला, मुझे ऐसी बहुत सी रचनायें पढने को मिलीं आप सब की ओर से, कि मेरे पास प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं।

एक बार फिर आप सबको नमन करते हुए आभार व्यक्त करता हूँ, साथ ही केवल दो पंक्तियाँ प्रस्तुत करता हूँ, विश्वास है आप तक जरुर पहुँच जाएँगी।


पलकों में बसी है पीर बहुत,
बरखा के आने की बारी है।
वो मुझमें रहती दूर बहुत,
ज्यों बादल पानी की यारी है।

-- Image from google with thanks.

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