Monday, October 10, 2011

एक सीख


छोटी गलतियाँ जब आतीं लेकर हार,
दुःख इतना होता है जैसे बड़ा पहाड़,
पर सूख गए आँसू उस दिन जब,
देखा सागर को भी खाते हुये पछाड़।।

और पाई एक सीख उस दिन कि,
छोटी खुशियाँ भी देती हैं हर्ष अपार,
बस कर्म धर्म है, करो प्रयत्न हजार,
कहती फिर आती ऊंची लहरों का अंबार।।

6 comments:

  1. प्रकृति से बढ़कर कोई शिक्षक नहीं...

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  3. अच्‍छा संदेश दिया...

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  4. शिक्षाप्रद-संदेश

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प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --

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