Wednesday, October 5, 2011

मैंने तो जीना सीख लिया


बस उस दिन ही फूट फूट रो,
मैंने मुस्काना सीख लिया,
हूँ अनपढ़ नादान भले ही,
खुद को समझाना सीख लिया॥

मुझको भी तो दर्द हुआ है,
हाँ खाई हैं चोटें हमने भी,
चोटों के ऊपर मिट्टी का,
मलहम सजाना सीख लिया॥

और सीख लिया हँस हँस,
खुद पर मुस्काना सीख लिया,
बहुत रो लिया मैंने अब तो,
आंसू को चिढाना सीख लिया॥

औरों के दुखड़ों को बाँट बाँट,
अपना दर्द भुलाना सीख लिया,
लिखना और गाना सीख लिया,
तेरे बिन मुस्काना सीख लिया॥

३५ रु दिहाड़ी वाले उस रईस ने,
खुली सड़क पर सर्दी में भी,
बिन चादर गर्माना सीख लिया॥

बहुत छोटी है दुनिया ये शायद,
क्योंकि अब तो यारों मैंने भी,
इन पन्नों और किताबों में ही,
अपना दिल बहलाना सीख लिया॥

मैंने भी जीना सीख लिया॥

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