Thursday, August 4, 2011

हम तो हँसते जा रहे थे



जिंदगी के अब तो सारे पर्त खुलते जा रहे थे,
हम उनमें और भी यूँ ही उलझते जा रहे थे,
देखना होता किसी को, तो देख लेता दर्द मेरा,
हम यही सोचकर बस यूँ ही हँसते जा रहे थे॥

7 comments:

  1. Life is like that...beautiful lines...

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  2. वाह बहुत खूब कहा है... दर्द जो खुद अपने को बयान न कर दे दर्द कहलाने के लायक भी कहाँ है...

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प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --