Wednesday, July 6, 2011

याद उन्हें भी आती है

मेरा यूँ रोज रोज इन पन्नों पर, याद उन्हें करते रहना,
अपने सपनों की जागी रातों में, पत्थरदिल कहते रहना,
इन जलती बुझती आँखों में, रोशनी अभी भी आती है,
पर पता चला एक दिन ऐसे ही, कि याद उन्हें भी आती है॥

पता नहीं जिद्दी ज्यादा हैं, या याद हमारी है मद्दिम ?
ये क्या गुनाह किया मैंने, क्यों याद रोक ली जाती है?
मेरे यारों से भी, वो जिद ही, जायज ठहराई जाती है,
            पर पता चला एक दिन ऐसे ही, कि याद उन्हें भी आती है॥

मैं बोल नहीं सकता, तो बिना लिखे अब, रह नहीं पाता,
उनकी यादों के सायों में, बिना गए अब, जी नहीं पाता,
खुश दिखता दिन भर, सोने से पहले, नमी ही जाती है,
खुश दिखता दिन भर, सोने से पहले(आँखों में), नमी ही जाती है,
पर पता चला एक दिन ऐसे ही, कि याद उन्हें भी आती है॥

हम दर्द छुपाने की खातिर, उनसे कुछ कह नहीं पाते हैं,
 उनकी याद नहीं जाती, दिन भर जो लड़ नहीं पाते हैं,
         उन पर अधिकार जताने पर, लड़ाई हो ही जाती है
            उन पर (नाजायज) अधिकार जताने पर, लड़ाई हो ही जाती है,
            पर पता चला एक दिन ऐसे ही, कि याद उन्हें भी आती है॥
        कि याद उन्हें भी आती है

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