Monday, July 4, 2011

ये तो बस कुछ पल होते हैं



ये तो बस कुछ पल होते हैं, जब इतना वैचैन होते हैं,
और वो साथ नही ये जान, हम तो बस मौन होते हैं।
होंठ विवश समझ, चल पडती है लेखनी इन पन्नों पर,
कोशिश खुशी बाँटने की, पर पन्ने बस दर्द बयाँ करते हैं॥

5 comments:

  1. होंठ विवश समझ, चल पडती है लेखनी इन पन्नों पर,
    कोशिश खुशी बाँटने की, पर पन्ने बस दर्द बयाँ करते हैं॥
    bahut khoob likha hai neeraj bhai :)
    ______________________________________________
    किसी और की हो नहीं पाएगी वो ||

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  2. धन्यबाद मनीष भाई

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  3. आपका लिखने का अंदाज़ बड़ा सुरीला |
    आपने इस लिखने में अपने दिल को उडेला है |

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प्रशंसा नहीं आलोचना अपेक्षित है --

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