Thursday, June 2, 2011

इस कदर रुसवा हुए हैं दोस्ती में हम तेरी


तुम कहो या न कहो


ये इल्म हमको है जरूर

हम तुम्हारी राह में

बस मील का पत्थर रहे हैं



-- VINITA SHUKLA

Complete Poem

Featured Post

मैं खता हूँ Main Khata Hun

मैं खता हूँ रात भर होता रहा हूँ   इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगन तोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँ ...