Tuesday, April 8, 2014

मैं, तुम और हम Main Tum aur Hum

मैं, तुम और हम होने का एहसास

उस वक्त
जब हम, हम नहीं थे
मैं और तुम थे,

उस वक्त
जब आसमां के टुकड़े टुकड़े हो चुके थे
और हर टुकड़ा बस
नीर होने को व्याकुल था
अश्रु होने को उत्सुक था

उस वक्त
जब संशय की कलुषित चादर
अरुणिमा की नेह आच्छादित किरणों को
मुझ तक पहुँचने से रोक रहीं थीं,

जानती हो
उस वक्त तुम्हारा होने की तड़प से
मुझे एहसास हुआ
कि मैं
अब मैं नहीं रहा …
और मुझे विश्वास था
कि तुम, तुम नहीं रही हो …
n  नीरज द्विवेदी
n  Neeraj Dwivedi

Tuesday, April 1, 2014

समर्पण Samarpan

समर्पण

मैंने कभी नहीं चाहा
कि तुम बदलो कभी
रत्ती भर भी
मेरे लिए,

हाँ बुरा लगा है मुझे कई बार
बताया भी तुम्हे
खुद को समझाया भी
कि इस बात का
अगली बार से मैं बुरा नहीं मानूँगा,

इधर तुम हो
कि दोबारा मौका ही नहीं देती
बुरा मानने का,

हर बार बदल जाती हो
थोडा सा
मुझे हरा जाती हो

हर बार मुझे जिता कर।

- Neeraj Dwivedi

Friday, March 21, 2014

जब अपना मोदी आयेगा Jab Apna Modi Ayega

जब अपना मोदी आयेगा

वो चाँद उधारी लेकर निकला आम आदमी सा,
भोले तारों को छलकर बन बैठा खास आदमी सा,
भूल गया है समयचक्र रातों का अंत सुनिश्चित है,
हर प्रभात के संग उदय होना सूरज का निश्चित है,
इस प्रभात के संग उदय होना मोदी का निश्चित है,

अरुणोदय का इन्तजार है भारत को सबसे ज्यादा,
राजा बनने को लालायित पिद्दी से पिद्दी प्यादा,
ये अँधियारा बीतेगा घरघोर कुहासा जल्दी जायेगा,
कुछ एक दिनों का इंतजार है अपना मोदी आयेगा,

इक सुभाष अंगडाई लेगा अपना शौर्य दिखायेगा,
भारत माँ के चरणों में जीवन का अर्घ्य चढ़ाएगा,
धरती को खुशहाली देगा वो भ्रष्टाचार मिटाएगा,
गद्दारों को चुन चुन कर फांसी लटकाया जायेगा,

जब अपना मोदी आयेगा।

-- नीरज द्विवेदी

Share करो, शरमाओ मत,
हम जीतेंगे, घबराओ मत।

जय हिन्द, जय भारत : Vote for India : अभी नहीं तो कभी नहीं।